हैडलाइन - “लालू ने घर बुलाया, चाकु घोपकर की वगताराम की हत्या” ध्यान से खबर पड़ने पर नीचे कोने में लिखा है- “लालू का असली नाम अज़ीज़ खान” मीडिया ने पूरी घटना की सूचना तो दी, लेकिन छद्म हिन्दू नाम का उल्लेख किया जिससे समाज में यह संदेश गया कि हत्या करने वाले व्यक्ति हिंदू था।
देख लो हिंदुओं इन कट्टरपंथिक से दोस्ती रखना, उनसे आर्थिक व्यवहार करना कितना घातक हो सकता है... यदि वागतराम ने अजीज खान से दोस्ती नहीं की होती, उसे पैसे नहीं दिए होते तो शायद वो आज आने परिवार के साथ होते लेकिन सेक्युलरिज्म की बीमारी ने उनसे उनका जीवन छीन लिया

