चंद्रशेखर रावण जो अब सदन में भी बैठता है लेकिन उसकी असलियत अब खुद वाल्मीकि समुदाय समझ रहा है इसलिए इसके पुतले फूंक उसके विरुद्ध नारे लगाकर अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे है। देश के सभी दलित बंधुओं को ऐसे एजेंडधारी नेताओं की सच्चाई को समय रहते समझ लेना चाहिए ताकि इनके एजेंडे के शिकार बनने से बचें
केवल एक एजेंडे के तहत ही जय भीम जय मीम के नारे लगाए जाते है और दलितों को अन्य हिंदुओं के विरुद्ध भड़काया जाता है। जब कही कोई मामला होता है जहां पीड़ित दलित लेकिन अपराधी मुस्लिम हो तो ये दलित हित चिंतक खामोश हो जाते है लेकिन यदि दलित सवर्ण का मामला हो तो सब अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं....ऐसे दुष्ट लोगों से सावधान रहे भारत

