दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज हिंदुओं के सर्वोच्च धार्मिक पद शंकराचार्य पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर ऐसी टिप्पणियां हो रही है जो अपने आप में शर्मनाक। पहले स्वरूपानंद जी को लेकर ऐसी बातें होती थी और अब उनके ही शिष्य अभी मुक्तेश्वर आनंद को लेकर ऐसी बातें हो रही है, इस बात पर अन्य शंकराचार्य को संज्ञान लेना चाहिए एक व्यक्ति के कारण शंकराचार्य जैसे महान पद का अपमान हो रहा है। ऐसे व्यक्ति को उसे महान पद पर बैठने का क्या अधिकार है?
यदि हमारे शंकराचार्यों ने इस बात पर संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही नहीं की और अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर अपना मत साफ साफ नहीं रखा तो आने वाले समय में शायद लोग शंकराचार्य पद की करीमा भुला देंगे और हिंदुओं का पतन होगा

