असम में एक जघन्य अपराध में, दो मासूम हिंदू नाबालिग लड़कियों के साथ दरिंदों ऐनुल अली और इकबाल हुसैन ने कथित तौर पर बलात्कार किया; उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 'मियां हटाओ' अभियान की बात कही थी और तब से विरोधियों की आलोचना का सामना कर रहे हैं।
इस घटिया वहशी मानसिकता को भगाने को बात करना गलत कैसे है? क्या बलात्कारी सोच को देश में , दुनिया में रहने देना चाहिए ताकि वो अपना दरिंदगी से महिलाओं की जिंदगी को बर्बाद करते रहें? इस घटिया मानसिकता का विरोध केवल हिमांता जी की जिम्मेदारी नहीं अपितु सभ्य समाज के हर नागरिक का ये कर्तव्य है

