बच्चों को सिर्फ़ पैसा कमाना मत सिखाओ, उन्हें संस्कार भी सिखाओ। पिता की मौत 30 दिन पहले घर पर हुई और माँ की मौत 20 दिन पहले, जबकि बेटा अमेरिका में है।सालाना पैकेज 90 लाख रुपये। पिता की मौत पहले हुई और फिर माँ की भी मौत हो गई। दोनों की लाशें घर पर ही रहीं। लाशें सड़ गईं और उनमें कीड़े पड़ गए, फिर भी बेटे को पता नहीं चला। उसने पता करने के लिए फ़ोन भी नहीं किया। ऐसे बच्चों की नौकरी, पढ़ाई और उनके कमाए हुए पैसे किस काम के?
ऊपर दिया गया वीडियो विदेश में पढ़ने और काम करने वाले कुछ बच्चों में दिख रही बेशर्मी की जीती-जागती मिशाल है। गलती केवल बच्चों की नहीं उन माता पिता की भी है तभी तो ईश्वर के विधान ने उन्हें इसी सजा दी, उनकी दुर्गति हुई, शरीर सड़ गया अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं हुआ। हां बच्चों ने दुनिया की नजर में गलत किय लेकिन इन बच्चों का पालन पोषण, उनके संस्कार किसकी जिम्मेदारी थी? आखिर बच्चे ऐसे कैसे हो गए?
केवल शादी करके सुहागरात मन्नाके बच्चे पैदा कर उन्हें स्कूली शिक्षा देकर विदेश भेज देना ही माता पिता का काम नहीं है, उन बच्चों को उचित धर्म ज्ञान देना संस्कार देना ये कौन करेगा? जैसा बोओगे वैसा पाओगे यही सृष्टि का नियम है🙏 वैसे ये घटना हमारी सड़ी हुई शिक्षा व्यवस्था का सच भी दिखाती है...ऐसे पढ़े लिखों से तो अनपढ़ अच्छे

