जिन्हें चमचे अंधभक्त कहते हैं वो भक्ति भी करते हैं और विरोध करने की शक्ति भी रखते हैं लेकिन चमचे वो विरोध कर सकते हैं उनका जिनकी वो चमचागिरी करते हैं....
UGC की कमिटी में तो सभी पार्टियों के लोग थे और अध्यक्ष तो कांग्रेसी दिग्विजय था फिर भी विरोध केवल BJP का और विरोध करने वाले सबसे आगे BJP सार्थक हो हैं जिन्हें चमचे अंधभक्त कहते हैं। चमचों में हिम्मत नहीं के वो अपनी पार्टी से सवाल कर सकें... क्या सपा, कांग्रेस TMC आदि के समर्थक (चमचे) स्वर्ण नहीं है? क्यों वो अपनी पार्टी से सवाल तक नहीं कर पा रहे..?

