क्या शंकराचार्य जैसे महान पद पर विराजमान होने वाला व्यक्ति इतना न समझ हो सकता है कि वो परम्पराओं का उल्लंघन करे वो भी वहां जहां लोगों के साथ अहित होने की संभावनाएं हो..ये वीडियो महत्वपूर्ण है.. शंकराचार्य को उपनाम नहीं ये एक महान पद है जिसको अपनी विशेषमताएं होती है
जिसका पट्टाभिषेक नहीं हुआ , जिसे तीनों पीठों ने शंकराचार्य नहीं माना जिसका मामल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जो बात बात पर हंगामे करता है, जो तू तड़क से बात करता है जो अहंकार के वशीभूत है वो कैसा शंकराचार्य?

