राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित गाँव साबला में एक दादी की अंतिम यात्रा में 50 से अधिक गौमाता भी हुई शामिल। कहते है गौमाता ही वैतरणी से पार लगाती है अब विचार कीजिए जिनकी अंतिम यात्रा में गौमाता स्वयं चलकर पहुंच जाए उसे बैकुंठ जाने से कौन रोक सकता है..?अद्भुत, अकल्पनीय ये वीडियो देखें ...🙏
वीडियो के अनुशार दादी ने अपने जीवन काल में भोजन गौमाता , कुत्तों , पक्षियों सबको कराया लेकिन अंतिम यात्रा में केवल गौमाताएं हो पहुंची इसीलिए गौमाता के जानवर कहना मूर्खता से अधिक कुछ नहीं। गौसेवा हर एक सनातनी का निहित कर्तव्य है, गौमाता की सेवा और गौ उत्पादों का अधिकतम प्रयोग गौ संरक्षण का आधार है।

