प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे में कूटनीति के साथ संस्कृति की भी झलक देखने को मिली. ताशकंद में उज्बेक छात्रों ने पीएम मोदी की कविताएं हिंदी और उज़्बेक भाषा में पेश कीं.‘अभी तो सूरज उगा है’ समेत तीन कविताओं की प्रस्तुति ने भारत-उज़्बेकिस्तान के सांस्कृतिक और शैक्षणिक रिश्तों को खास अंदाज में सामने रखा.
🇮🇳🇺🇿 21वीं सदी का सांस्कृतिक संबंध: ताशकंद में उज्बेक छात्रों ने पढ़ीं पीएम मोदी की कविताएँ। ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ संवाद के दौरान शानदार सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रस्तुत किया।उज्बेक छात्रों ने नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी तीन कविताओं का हिंदी और उज़्बेक दोनों भाषाओं में पाठ किया।
🌅 “अभी तो सूरज उगा है” — नई शुरुआत और उम्मीद का संदेश देने वाली कविता।
🇮🇳 “नए भारत के नए संकल्प” — आत्मविश्वासी और आकांक्षी नए भारत की भावना को दर्शाती कविता।
🕊️ “मानवता को कहीं न लग जाए दाग” — मानवता, करुणा और शांति का संदेश देने वाली कविता।
छात्रों की प्रस्तुतियों ने हिंदी, भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी रुचि और समर्पण को दर्शाया।
उज्बेकिस्तान में दशकों से भारतीय फिल्मों और बॉलीवुड गीतों के प्रति गहरा लगाव रहा है; अब भारतीय साहित्य और कविता से भी जुड़ाव बढ़ रहा है।
21वीं सदी का नया सांस्कृतिक सेतु: भारत में दशकों पहले लिखी गई कविताएँ आज ताशकंद के युवा छात्र पढ़ रहे हैं, उनका अनुवाद कर रहे हैं और प्रस्तुत कर रहे हैं।
❤️ बॉलीवुड से हिंदी कविता तक — भारत और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक मित्रता 21वीं सदी में और मजबूत हो रही है।
🇮🇳🇺🇿 21वीं सदी केवल रणनीतिक साझेदारी की नहीं, बल्कि भाषाओं, संस्कृतियों और दिलों को जोड़ने की भी सदी है।

