खबरों के मुताबिक, छात्रों से दोस्ती करके और मदद का ऑफर देकर संपर्क किया जाता है, फिर उन्हें रविवार के कार्यक्रमों में बुलाया जाता है, जहाँ धीरे-धीरे ईसाई फिल्में, मुफ्त खाना और प्रार्थनाएं शामिल की जाती हैं।छात्र का आरोप है कि इसके बाद आर्थिक या पढ़ाई-लिखाई में मदद, मानसिक दबाव और आखिर में धर्म बदलने का दबाव डाला जाता है।
रिपब्लिक ने इसे एक सुनियोजित "धर्म परिवर्तन रैकेट" बताया है: दोस्ती → खाना/फिल्में/प्रार्थनाएं → दबाव + लालच।सोचिए किस हद तक धर्मांतरण खेल आगे बढ़ रहा है और हिंदू समाज अब भी ना जाने कौनसे नशे में झूल रहा है के उसे इन सबसे कोई खास फरक ही नहीं पड़ रहा। कहीं जेहादी , कहीं किशनरी, कहीं वामी तो कही कौन, सबका टारगेट हिंदू है और हिंदू नींद में है...

