सुरेश रैना: "1990 में कश्मीर में जो हुआ, उसके कारण मेरे परिवार को अपना घर छोड़ना पड़ा, लेकिन कश्मीर हमेशा मेरे दिल में रहेगा।मेरा जन्म और पालन-पोषण कश्मीर के रैनावाड़ी में हुआ। मेरे पिता भारतीय सेना में थे।सरकार अच्छा काम कर रही है, लेकिन अभी भी न्याय का इंतज़ार है। हमने अपने घर और ज़मीन खो दिए। कश्मीरी हिंदुओं को अपनी मातृभूमि में सम्मान के साथ लौटने और शांति से रहने का अधिकार मिलना चाहिए।"
1990 के कश्मीर नरसंहार पर भले ही हमारे कोर्ट ने न्याय की गुहार लगाने वालों को ठेंगा दिखा दिया हो लेकिन आज भी उस जेहादी कांड से पीड़ित लोगों को न्याय की आशा है। भाजपा सरकार में थोड़े बहुत घाव तो भरे है लेकिन घाव में दर्द अब भी जीवित है... अब भी लोग न्याय की आस लगाए बैठे है

