यह भी देखना चाहिए कि आक्रमणकारी किस तरह के लोग थे। वे ‘मनुस्मृति’ को मानने वाले तो थे नहीं, जिसमें युद्ध के दौरान महिलाओं, बच्चों और सामान्य नागरिकों को नुकसान न पहुँचाने की बात कही गई है; बल्कि यह भी कहा गया है कि यदि शत्रु निहत्था हो, तो उस पर प्रहार नहीं करना चाहिए।
वे एक आसमानी कानून को मानते थे, जिसमें ‘माल-ए-गनीमत’ की अवधारणा थी। यानी युद्ध में जीती गई औरतों को सेक्स स्लेव बनाना उनके लिए स्वीकार्य था। ऐसे में उन स्त्रियों के सामने क्या विकल्प थे? उन्हें सेक्स स्लेव बनने और मृत्यु में से किसी एक को चुनना था। उन्होंने मृत्यु का वरण किया..इसे वीरता ही कहा जाएगा, चाहे किसी मोटी-बुद्धि वाली, हथिनी-फिगर वाली अभिनेत्री को यह पसंद आए या नहीं।

