राहुल की बेवजह की बकवास के कारण एक ऐसा ग्रन्थ जिसे हिन्दुओं ने लगभग पढ़ना छोड़ दिया था अब उसे पढ़ने की जिज्ञासा के चलते पिछले महीने अगस्त मे मनुस्मृति की लगभग 45 हजार प्रतियाँ बिकी हैँ जबकि साधारणत: 1000-1200 प्रति हर माह बिक्री होती थी कई बार राहुल जैसे मू₹ख नेता गलती से ही सही पर कुछ अच्छा काम कर जाते हैँ । बड़े से बड़े साधु संत भी चाहते तो किसी धर्मग्रन्थ की इतनी प्रसिद्धि नहीं कर पाते थे राहुल ने मनुस्मृति की बेसिर पैर की आलोचना क्या की... लोगों मे इस ग्रन्थ को पढ़ने की होड़ लग गई.
राहुल की बकवास से जो काम अधूरा रह गया था उसे अधिक हवा देने का काम उन मूर्खो ने किया जो इसे सार्वजनिक रूप से जलाने लगे.. उसके कारण अधिक जिज्ञासा हुई और लोगों ने मनुस्मृति खरीदनी शुरू कर दी..कांग्रेस के मु₹खादीराज को एक बार पुनः धन्यवाद

