लेखक की कलम से ✍️३६ वर्ष पहले मैने भारत में एक ब्रिटिश कंपनी join की। (१ डायरेक्टर भारतीय था, जिसके चलते भारत में डेवलपमेंट सेंटर खोला था) तब बसपा ने प्राइवेट कंपनी में आरक्षण की बात की थी। इंग्लैंड से मैसेज आया की हमने इंडिया ऑपरेशन बंध करना होगा। ( वो चीन के लिए सोच रहे थे)। किंतु फिर यह मामला दब गया। तो हम बच गए। किन्तु नए बिज़नेस चीन, वियतनाम इत्यादि जगह ले गए थे।
अब आउल जी प्राइवेट कंपनी में आरक्षण की बात उछाल रहे हैं। उनका तो कोई नुक्सान नहीं है। उनका इन्वेस्टमेंट कहा है?अगर प्राइवेट कंपनी में आरक्षण का दबाव बना तो?विदेशी कंपनियां भाग जायेगी। जिससे विदेशी निवेश से आमदनी ख़त्म होगी।नये स्टार्टअप भी सम्भल नहीं पायेंगे।छोटी और मध्यम कंपनियां भी बंद होगी।बहुत बड़ी कंपनियां कुछ समय खींचेगी, किंतु थोड़े समय बाद वो भी।चीन में जो ३० वर्ष पहले जो उच्च कक्षा की electronic , चिप फेब कंपनियां गई थीं। भारत में वो अब शुरुआत हो रही है। वो तो जन्म से पहले ही मर जायेगी।तो भारत की बर्बादी का भुगतान कौन उठायेगा?😯?

