17 अक्टूबर 1937। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखा और वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद पर अपना स्पष्ट रुख रखा। बोस का तर्क था कि राष्ट्रवादी मुसलमानों की वास्तविक आपत्तियों का समाधान होना चाहिए, लेकिन सांप्रदायिक दबाव के आगे लगातार झुकने से नई मांगों का सिलसिला खत्म नहीं होगा।
इसके बाद नेहरू ने भी जवाब दिया और आनंदमठ, गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से की आपत्तियों पर अपना पक्ष रखा। उसी दौर में कांग्रेस कार्यसमिति ने सार्वजनिक/राष्ट्रीय अवसरों पर वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों के प्रयोग की सिफारिश की।लेकिन यहीं से एक ऐतिहासिक बहस पैदा होती है—क्या यह वीडियो पूरा देखिए और अपनी राय जरूर बताइए—1937 में सही कौन था: सुभाष या नेहरू?

