साल 2011 में जब अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद में बकायदा पंडित नेहरू को कोट करते हुए कहा था।
"भूख हड़ताल लोकतंत्र के खिलाफ है। अगर ऐसे ही फैसले होने लगे तो संसद बंद करनी पड़ेगी।"
तब चिदंबरम जी ने बड़े शान से कहा था कि भूख हड़ताल कोई लोकतंत्र नहीं, बल्कि एक गलत रास्ता है।
लेकिन राजनीति का पहिया भी गजब घूमता है, आज जब खुद विपक्ष में हैं, तो हर छोटे-बड़े मुद्दे पर उपवास और धरने याद आ रहे हैं। नेहरू जी को भी क्या पता था कि भविष्य में उनके अपने ही वंशजों और नेताओं के लिए यही अलोकतांत्रिक भूख हड़ताल राजनीति में जिंदा रहने का एकमात्र सहारा बनेगी। दोगलेपन की भी एक सीमा होती है भाई

