दो ताजा खबरें है जो शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण के खेल को एक्सप्लेन कर रही है...
1 - किशनगंज, बिहार जहां केरल की मजहबी संस्था द्वारा संचालित स्कूल में बच्चों को मजहबी तालीम दी जा रही थी।
2 - लुधियाना, पंजाब जहां हिंदू बच्चे के साथ बर्बरता की खबर है
ये दोनों खबरें ऐसी स्कूलों से है जिनका प्रबंधन गैर हिंदुओं के पास था और पीड़ित हिंदू...लेकिन क्या गलती इसमें हिंदुओं की नहीं?
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इस प्रकार की असंख्य खबरें आ चुकी है लेकिन हिंदू अभिभावक न जाने कौन से नशे में है जो अपने बच्चों को ऐसी स्कूलों में डालते हैं जिनका प्रबंधन धर्मांतरण के ठेकेदारों के पास होता है। इसलिए यह कहना कि गलती मात्र धर्मांतरण के दलालों की है पूरी तरह सही नहीं होगा यह उन अभिभावकों की भी गलती है जो सच जानते हुए भी अपने बच्चों को इन धर्मांतरण माफियाओं की गोद में ले जाकर खुद ही बिता देते हैं

