लगातार देश भर में हो रही जहदी घटनाओं के बाद क्या यह कहना गलत है कि सब एक हैं चाहे लड़के हो, लड़की हो, अनपढ़ हो, पढ़े लिखे हो, नेता हो, अभिनेता हो, मां-बाप हो या बाप दादा हो, छोटे बच्चे हो या बड़े हो सब की सोच एक है, सबका लक्ष्य एक है हाँ तरीका अलग हो सकता है लेकिन मंजिल एक है "जन्नत"
हिंदू जितनी जल्दी इस सत्य को समझ जाए और इस जेहादी वायरस से अपनी तथा अपनों की सुरक्षा हेतु उचित प्रबंध करें उतना ही अच्छा है अन्यथा आज किसी और की बेटी इन जेहादियों की शिकार हो रही है कल को तुम्हारी बेटी भी इन जेहादियों की किसी न किसी प्रकार से शिकार होगी और फिर न्याय के लिए इस कानून के पीछे घूमते नजर आओगे, लेकिन यहां हिंदुओं को इतनी आसानी से न्याय भी नहीं मिलता.

