लड़के-लड़कियों में आकर्षण 14-15 साल में शुरू हो जाता है। प्रकृति ने शरीर तभी तैयार कर दिया।
65-70 साल पहले तक बाल विवाह होते थे।
आज कानून कहता है 18-19 साल से पहले नहीं।
*सवाल ये है:* अगर प्रकृति को 18 में ही शादी करानी थी तो शरीर 14 में क्यों तैयार करती है?
*जवाब 2 पहलू में है:*
*1. प्रकृति vs कानून*
प्रकृति ने शरीर तैयार किया, कानून ने जिम्मेदारी की उम्र तय की।
14-15 की उम्र में शरीर तैयार होता है, पर पढ़ाई छूट जाती है, माँ-बच्चे की सेहत को खतरा रहता है, कमाई का जरिया नहीं होता।
18+ की उम्र में ग्रेजुएशन का मौका मिलता है, शारीरिक-मानसिक परिपक्वता आती है, अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिलता है।
*2. असली जड़ - संस्कारों की कमी*
पहले Joint Family थी। दादा-दादी, चाची-ताई बच्चों को धर्म-कर्म सिखाते थे।
अब माँ-बाप 9-5 की नौकरी में। वो स्पेस खाली है।
*तो उपाय क्या है?* 👇
अगर आपके बेटे-बेटी 8-18 साल के हैं, तो _रोज 1 घंटा_ उनके साथ बैठिए।
फोन साइड रख के बात करिए। धर्म, मर्यादा, अच्छे-बुरे की शिक्षा दीजिए।
योगी जी कहते हैं बंटोगे तो कटोगे।
ये बात घर पर भी लागू है।
अगर परिवार में ही बंट गए, संवाद नहीं रहा... तो फिर दुनिया की कोई ताकत कटने से नहीं बचा सकती।
कानून 18 का हो या 28 का...
अगर माँ-बाप ने समय नहीं दिया, तो उम्र कुछ भी हो, बच्चा भटक सकता है।
कानून पुलिस बन सकता है, परपका माँ-बाप ही गुरु बन सकते हैं_ 🙏
_सोचिएगा जरूर_ ✍️ _स्वतंत्र_
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_P.S. - Share कीजिए अगर सहमत हैं। शायद किसी का 1 घंटा किसी बच्चे का भविष्य बचा दे_ 🤝

