यह घटना वाकई बहुत अधिक चिंताजनक है परंतु शायद होगा यह की कुछ दिन इस पर चर्चाएं होंगी, वीडियो बनाए जाएंगे, रील बनेंगी, और हल्ला भी होगा लेकिन फिर इसे भुला दिया जाएगा और जो काम पहले हो रहा था वह ऐसे ही अनवरत चलता रहेगा। खैर कॉर्पोरेट जेहाद के एक पीड़ित की आप बीती हमें सुनाई चाहिए।
यह आप बीती भले ही किसी एक पीड़ित की है लेकिन यह सच्चाई अनेकों अनेक पीड़ितों की होगी जो सामने नहीं आ रही। इसे गंभीरता से सोचिए कि ना जाने कितने बड़े-बड़े कॉरपोरेट्स में किस-किस प्रकार की प्रताड़ना हिंदू युवाओं को और खास कर युवतियों को सहनी पड़ रही होगी और उनके साथ क्या क्या हो रहा होगा। शायद यही कारण है कि पहले बेटियों को घर की दहलीज से बाहर नहीं निकलने दिया जाता था..क्योंकि समाज में अनेकों गिद्ध उन्हें नोचने के लिए तैयार रहते हैं

