यह उमाशंकर उपाध्याय नहीं बल्कि उमाशंकर भांट है, यह सच्चाई है । उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बाभनपुर गांव के ग्राम प्रधान द्वारा जारी प्रमाण पत्र पढ़ लिजिए। जाती से फरक नहीं पड़ता लेकिन सच छुपाने की जरूरत क्यों? उमाशंकर भांट उर्फ अविमुक्तेश्वरानंद के गुरू स्वामी स्वरूपानंद जी ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने ज्योतिष पीठ व द्वारका शारदा पीठ का अधिकारिक रुप से उत्तराधिकार व शंकराचार्य घोषित नहीं किया है .फिर उमाशंकर भांट शंकराचार्य कैसे बना ?
उमाशंकर भांट कैसे स्वामी स्वरूपानंद का उत्तराधिकारी बना ?सत्य दुनिया के सामने है, किस प्रकार उमाशंकर भांट स्वघोषित शंकराचार्य बना, इसलिए हम लोग इसे शंकराचार्य नहीं मानते । कालनेमी अनेक रुप धारण कर लें, लेकिन पहचान उजागर हो ही जाता है ।
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यह सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट है इसकी सच्चाई की पुष्टि हम नहीं करते परंतु इस व्यक्ति की जैसी हरकतें हैं उन्हें देखकर यह पोस्ट सच्ची प्रतीत होती है

