मकसद : योगी जी की हिंदुत्व छवि को खराब करना..पिछली बार भी महाकुंभ में मोनी अमावस्या के समय पर भगदड़ इसलिए हुई थी क्योंकि भीड़ ने बेरीकेड को तोड़ दिया था.. इस बार भी बेरीकेड को तोड़ने का प्रयास किया गया.. परंतु प्रशासन ने समय रहते ही भीड़ पर नियंत्रण कर लिया.. प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में सिर्फ एक स्वयंगोशित तथाकथित संत के इलावा किसी भी अन्य साधु संत को संगम स्नान में कोई समस्या नहीं हुई है...
विपक्ष ने पिछले वर्ष हुए महाकुंभ में "मोनी अमावस्या" में हुई भगदड़ पर बहुत घटिया राजनीति की थी...इस बार पुनः "मोनी अमावस्या" पर संगम में भगदड़ नहीं हो, इसलिए प्रशासन ने बहुत सख्ती कर रखी है... क्योंकि विपक्ष को तो राजनीति करने के लिए मासूम जनता की लाशे ही चाहिए...
अगर कोई भी बड़ा समागम बिना किसी विघ्न के निकल जाए, वह विपक्ष को कैसे मंजूर होगा...??शोशल मीडिया में जितने भी "जातिवादी" अब "कट्टर झट्टर स्वयंगोशित हिंदुत्वादी" बने फिर रहे है, वह योगी जी के खिलाफ नकारात्मक बयानबाजी करने में लगे हुए है..शोशल मीडिया में योगी जी को हिंदुत्व का ज्ञान देने वाले असल में पैदाइशी पीढ़ी दर पीढ़ी कुनबों के गुलाम दलाल रहे है, कोई पैसे देकर ठेकेदार रहा, कोई पैसे देकर नेतागिरी किया, कोई पैसे देकर सरकारी नौकरी एवं ट्रांसफर लिया...
ऐसी एक बहुत बड़ी भ्रष्ट जातिवादी जमात है, जो वही पैसे ले देकर -लूट घुसूत वाला भ्रष्ट सिस्टम पुनः चाहती है.. चाहे, फिर से बाबर औरंगजेब अंग्रेज का जंगलराज आ जाए.. इनको बस "महालूट/ हराम" के माल में हिस्सा मिलते रहना चाहिए...

