SC/ST एक्ट केवल गाली देने से नहीं लगेगा, इरादा साबित करना बेहद जरुरी 🔥 अदालत ने SC/ST एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधान दोहराते हुए कहा कि सिर्फ गलत शब्दों के इस्तेमाल से अपराध नहीं बनता, जब तक अपमान का उद्देश्य जातिगत न हो। अब थोड़ा थोड़ा ऐसा लगता है मानो सवर्णों को भी माननीय ने इंसान मान लिया
यहां प्रश्न ये उठता है कि लगभग 75+ वर्षों से क्या इस तरफ किसी ने नहीं सोचना चाहिए था? क्या अबतक जितने गलत मुकदमे करके लोगों को बर्बाद किया गया उनकी जिम्मेदारी कानून की नहीं? कोर्ट की नहीं? कानून की आड़ में लोगों का पूरा पूरा जीवन बर्बाद होता रहा और अभी भी अनेकों घटिया कानून है जो लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं लेकिन उन अब पर सोचने वाला कोई नहीं.. अब सुप्रीम कोर्ट ने किसी एक कानून पर तो सोचा.. ! लेकिन ये कोई अहसान नहीं किया... बल्कि देरी की है और कहते है न जस्टिस delayed ... जस्टिस denied

