आजकल आधुनिकता के नाम पर का प्रकार लोगों के दिमाग में बेवकूफी भरी गई है जिसकी कोई सीमा नहीं... जो चीजें समान हो ही नहीं सकती वहां भी समानता की कोशिश करते है और सब कुछ बर्बाद कर लेते हैं.।।
महिला पुरुष में बराबरी के नाम पर अनेकों घर बर्बाद हुए है और आगे भी होंगे, महिला और पुरुष ईश्वर की 2 अमूल्य रचनाएं है और दोनों में ईश्वर ने ही असमानता दी है लेकिन कुछ कथित बुद्धिजीवी दोनों को समान बनाने की बातें कर ईश्वर की रचना को चुनौती दे रहे है और सबकुछ बर्बाद कर रहे...ऐसे मूर्ख बीमुद्धजीवियों से बचे समाज

