खरमास (या खर मास) हिंदू पंचांग में एक विशेष अवधि है, जो साल में दो बार आती है। यह तब शुरू होता है जब सूर्य देव धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करते हैं (ये दोनों राशियां बृहस्पति की हैं)। इस दौरान सूर्य की स्थिति के कारण गुरु का प्रभाव कमजोर हो जाता है, जिसे ज्योतिष में गुर्वादित्य योग कहा जाता है। इसलिए इस महीने को अशुभ माना जाता है और कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नया व्यापार शुरू करना आदि) नहीं किए जाते।
खरमास क्यों अशुभ माना जाता है?
• ज्योतिषीय कारण: सूर्य के गुरु की राशि में जाने से सूर्य का तेज मंद पड़ जाता है और शुभ कार्यों के लिए आवश्यक ऊर्जा कम हो जाती है।
• पौराणिक कथा: मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ से ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। एक बार उनके घोड़े थक गए और प्यासे हो गए। सूर्य ने उन्हें आराम देने के लिए रथ में खर (गधे) जोत लिए। गधों की गति धीमी होने से रथ मंद चला और इस पूरे महीने को खरमास कहा गया (खर का अर्थ गधा या कर्कश)।
खरमास में क्या करें?
यह अवधि आध्यात्मिक कार्यों के लिए बहुत शुभ मानी जाती है:
• सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें।
• रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य (जल चढ़ाएं), आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जप करें।
• दान-पुण्य, गंगा स्नान, मंत्र जप, हनुमान चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
• तुलसी पूजा, भजन-कीर्तन और ध्यान करें।
• गरीबों को दान दें – इससे पुण्य मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
खरमास में क्या न करें?
• विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, मुंडन, जनेऊ संस्कार आदि मांगलिक कार्य।
• नए व्यापार या बड़ी खरीदारी की शुरुआत (हालांकि जरूरी सामान खरीद सकते हैं)।
• घर में निर्माण या बड़े बदलाव।
• 2025 में दिसंबर का खरमास 15 या 16 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) तक रहता है।
• अगला खरमास मार्च-अप्रैल 2026 में होगा।
खरमास भले अशुभ कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन यह आत्मिक उन्नति और भक्ति का सुनहरा समय है। इस दौरान सूर्य उपासना से विशेष लाभ मिलता है!

