कभी दुनिया बातचीत से भरी थी, आज बस इमोजी और रिएक्शन तक सिमट गई है।
कभी लोग दिल खोलकर बातें किया करते थे, आज दिल की बातें स्टेटस पर लिख देते हैं, क्योंकि शायद अब सुनने वाले लोग ही नहीं बचे।
कभी हम अपनी कल्पनाओं से कुछ नया रचा करते थे, आज हमारी दुनिया कुछ सेकंड की रील्स और शॉर्ट्स में सिमट गई है।
कभी मोबाइल इंसानों को आपस में जोड़ने का ज़रिया था, आज मोबाइल बोल रहे हैं और इंसान खामोश होते जा रहे हैं।
हमने मशीनें बनाई थीं अपनी ज़िंदगी आसान करने के लिए, लेकिन न जाने कब हम खुद मशीनों की तरह जीने लगे।
और सबसे बड़ी विडंबना तो देखिए...
आज हमारे पास खुद को व्यक्त करने के हज़ारों तरीके हैं, लेकिन दिल की बात सुनने वाला कोई नहीं।
हम दुनिया से तो जुड़ गए, लेकिन अपनों से दूर हो गए।
सवाल यह नहीं कि तकनीक कितनी आगे बढ़ गई, सवाल यह है कि इस दौड़ में इंसानियत कितनी पीछे छूट गई।
हम इमोजी भेजकर भावनाएँ जताना सीख गए, पर सामने बैठे इंसान की खामोशी पढ़ना भूल गए।

