बॉम्बे हाई कोर्ट चाहता है कि BMC दीया मिर्ज़ा के पटाखे न जलाने वाले वीडियो को बहाल करे, और इसके लिए भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान का हवाला दिया गया है। लेकिन दिवाली के दौरान पर्यावरण को लेकर सक्रियता हिंदुओं के लिए उपदेश क्यों बन जाती है, जबकि अन्य धर्मों की प्रथाओं पर वैसी कोई जांच-परख नहीं होती?
अगर सभी लोग एक ही हवा में सांस लेते हैं, तो फिर केवल हिंदुओं को ही बार-बार यह क्यों बताया जाता है कि उन्हें अपने त्योहार कैसे मनाने चाहिए? आखिर क्यो ये ज्ञान देने वाले कथित ज्ञानी केवल हिंदू धर्म हिंदू परंपराओं और हिंदू त्योंहारों पर ही अपना सड़ा हुआ ज्ञान देने क्यों आ जाते हैं? हिंदुओं को ऐसे दोगलों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए और पुरजोर विरोध करना चाहिए जो के हिंदू नहीं कर पा रहे और यही कारण है कि कुकुरमुत्तों की तरह है कथित ज्ञानी लोग हिंदुओं को ज्ञान बांटने चले आते हैं
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