हम घोर कलयुग के दौर में जी रहे हैं, जहाँ दुल्हन को 'पिठी' या हल्दी की रस्म में देखा जा सकता है—एक ऐसी प्रथा जो पहले कभी नहीं थी। सतयुग में लोग स्वभाव से ही सदाचारी होते थे; रामायण में हल्दी जैसी किसी रस्म का कोई जिक्र नहीं मिलता, जो आज शादियों में आम बात हो गई है।
उस समय किसी को शुद्ध करने या नकारात्मकता से बचाने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि सब कुछ अपने आप में ही पवित्र था।सतयुग पहला और सबसे सदाचारी युग था। और यहाँ हम देखते हैं कि दूल्हे को नहलाने की रस्म में दुल्हन मौजूद है और वह केवल महिलाओं से घिरी हुई है। बॉलीवुड हिंदुओं के लिए एक अभिशाप है।

