सारे शांतिदूतों ने करोड़ों रुपए अपने दुकानों में लगा दिया है... घर और गोदाम को माल से भर दिया है... जूते चप्पल की दुकान, रेडीमेड कपड़ों की दुकान, पर्स बेल्ट घड़ी से लेकर गंजी और अंडरवियर तक.. ठीक इसी तरह LED, एलसीडी टीवी, स्पीकर, मोबाइल, कैमरा आदि हर तरह का इलेक्ट्रॉनिक आइटम चाइना से लाकर ठूंस चुके हैं.... पूरे बाजार की रौनक बढ़ी हुई है..... हिन्दू के एक एक पैसे को लूटने के लिए भेड़ियों की तरह नजरें जमा कर बैठे हुए हैं... जिसे कमाने के लिए साल भर खून पसीना बहाया है...
ये शांतिदूत ... हर साल .. अक्टूबर से लेकेर मार्च की होली तक मे लखपति और करोड़पति हो जाते हैं... सिर्फ हिंदुओं को सामान बेच कर...और हिंदुओं को क्रांति का झंडा थमा कर कहते हैं......"मैं भी बेरोजगार" बोलकर नारे लगाओ....जबकि खुद दुकान लगाकर लाखों कमाते हैं....इतना तो कर ही सकते हो.. कि जो भी चीज आपको हिंदुओं के दुकान से मिलती है , वो आप वहीं से लो..उस हिन्दू दुकान दार को पहले कमाई करने दो क्योंकि त्योहार उसका है शांतिदूतों का नहीं
लालची, सेक्युलर हिन्दू इनसे ही सामान खरीदता है जिसका दुष्परिणाम उनके साथ साथ पूरे समाज को भुगतने पड़ते है

