इंदौर, देवास, MP: फिरोज़ खान इंदौर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में हेड कांस्टेबल (ड्राइवर) के पद पर तैनात हैं। लोकायुक्त की शुरुआती जांच से पता चला है कि उनके पास उनकी वैध कमाई से कहीं ज़्यादा संपत्ति है, और उनके तार इंदौर, देवास और उज्जैन तक जुड़े हुए हैं। लोकायुक्त ने 15 जगहों पर छापेमारी की है। लोकायुक्त की जांच में सामने आए आंकड़े इस प्रकार हैं-
वैध आय: आरोपी की कुल वैध आय = 1 करोड़ 93 लाख 84 हज़ार रुपये।
कुल खर्च: फिरोज़ खान का कुल खर्च लगभग 12 करोड़ 95 लाख 72 हज़ार रुपये पाया गया है—यानी उनका खर्च उनकी आय से लगभग 11 करोड़ 1 लाख 87 हज़ार रुपये ज़्यादा है।
अचल संपत्ति: उनके पास 33 अचल संपत्तियां हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इन ज़मीनों और मकानों को खरीदने में 11 करोड़ 57 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि इनकी मौजूदा बाज़ार कीमत लगभग 29 करोड़ 73 लाख रुपये आंकी गई है।
इस पूरे मामले में न केवल फिरोज़ खान, बल्कि उनके करीबी सहयोगी भी शामिल हैं—जिनमें रोशनी वर्मा नाम की एक महिला प्रमुख है।गुरान गांव (सांवेर तहसील) में 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़ा एक समझौता सामने आया है। आरोप है कि फिरोज़ खान ने एक किसान परिवार के आपसी पारिवारिक विवाद का फायदा उठाया और रोशनी वर्मा के नाम पर इस ज़मीन का एक रजिस्टर्ड समझौता करवा लिया। पीड़ित किसान के बेटे का दावा है कि कोर्ट से स्टे (रोक) मिलने और समझौता हो जाने के बाद भी, उस पर दबाव डालकर खाली कागज़ों पर दस्तखत करवाए गए।
स्रोत- newstak.in

