पुनीत जी का भी यही मानना है कि शाह एक कुंठित व्यक्ति हैं, एक "दिमागी नक्सली" हैं जो चुनिंदा मुद्दों पर ही आक्रोश जताते हैं। जब देश किसी संकट का सामना कर रहा होता है, तो वे कहीं नज़र नहीं आते, लेकिन जब भारत की छवि खराब करने की बात आती है, तो वे सबसे पहले बोलने वालों में शामिल होते हैं।नसीरुद्दीन शाह जैसे लोग असल जिंदगी के 'गुलफाम हसन' हैं!
अब जरुरत है के हर एक दिमागी नक़्शल का सही इलाज हो उन्हें उनकी औकात और दुन्या को उनकी सच्चाई दिखाई जाए. आम जनमानस से लेकर हर एक राष्ट्रवादी को चाहे तो फ़िल्मी सितारा हो, व्यापारी हो, खिलाडी हो या कोइ भी हो, यदि वो राष्ट्रवादी है तो उन्हें दिमागी नक्सलीयों का पुरजोर विरोध करना ही चाहिए...
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