जिस यात्रा के जरिए कांग्रेस ने राहुल गांधी को लॉन्च करने की रणनीति बनाई थी, अब धीरे-धीरे उससे जुड़े विवादों और आरोपों की चर्चा सामने आ रही है। यात्रा में शामिल रहे लोगों ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। 👇
🇨🇭 स्विट्जरलैंड से भारत आए नितिन परमार ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में यात्रा के दौरान VIP कल्चर को लेकर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, यात्रा दो हिस्सों में बंटी हुई थी—एक VIP और दूसरा आम लोगों का। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए विशेष इंतजाम होते थे, जबकि आम लोगों को अपने ठहरने और खाने तक की स्पष्ट जानकारी नहीं होती थी।
उन्होंने दावा किया कि राजस्थान के दौसा में एक बार उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। लेकिन वापस कैंप पहुंचने पर किसी ने उनका हाल तक नहीं पूछा। 😔
💰 राहुल गांधी से मिलने के लिए पैसे मांगने का आरोप!
नितिन परमार के दावों के मुताबिक, कुछ लोगों ने राहुल गांधी से मिलने की इच्छा जताई तो उनसे कथित तौर पर ₹10,000, ₹20,000 और यहां तक कि ₹35,000 तक मांगे जाने की बात सामने आई। यदि ये आरोप सही हैं, तो आम जनता से जुड़ने के दावों पर गंभीर सवाल उठते हैं।
🍷 यात्रा में शराब और दुर्व्यवहार के आरोप!
कांग्रेस की पूर्व नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर राधिका खेड़ा ने भी यात्रा के दौरान अपने साथ कथित दुर्व्यवहार और शराब पहुंचाने के लिए बार-बार फोन किए जाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शराब पीने के बाद कुछ कांग्रेस प्रवक्ताओं और मीडिया से जुड़े लोगों ने उनके साथ बदसलूकी की।
राधिका खेड़ा के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी से अपनी शिकायत रखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें उनसे मिलने नहीं दिया गया। बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
❓ अब सवाल उठता है—आखिर आम कार्यकर्ताओं की सुनवाई कहां थी?
जिस यात्रा को आम जनता, गरीबों और कार्यकर्ताओं से जुड़ने का माध्यम बताया गया, उसी के दौरान शामिल रहे लोगों ने VIP संस्कृति, उपेक्षा और दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए।
🚛 इसके अलावा, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यात्रा में इस्तेमाल किए गए कंटेनरों और वाहनों के किराये का भुगतान न होने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
⚠️ ध्यान देने वाली बात: ये आरोप और संबंधित लोगों के दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
🇮🇳 भारत जोड़ो यात्रा का नारा था—जनता से जुड़ना। लेकिन अगर अपने ही कार्यकर्ताओं को उपेक्षा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा, तो जवाबदेही किसकी है?
तस्वीरों में दिखने वाली राजनीति और पर्दे के पीछे की हकीकत के बीच का अंतर जनता जानना चाहती है! 🔥
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