=> रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी अब सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग (डायवर्जन) की जांच के केंद्र में है।
• ₹426.46 करोड़ की राशि को कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) माना गया है।
• आरोप है कि इस निजी कैंपस को बनाने के लिए सरकारी फंड, निर्माण सामग्री और सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
• आरोप है कि ठेकेदारों ने पैसे को 'डोनेशन' (दान) के रूप में वापस ट्रस्ट को भेज दिया।
सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू? अखिलेश यादव की सरकार में आज़म खान यूपी के शहरी विकास मंत्री थे।=> दिलचस्प बात यह है कि कैंपस में काम करने वाला 'जल निगम' उन्हीं के विभाग के अंतर्गत आता था।सार्वजनिक परियोजनाएं। निजी कैंपस। डोनेशन की आड़ में कथित रिश्वत (किकबैक)। ED की जांच अब इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि कैसे सरकारी संसाधनों को कथित तौर पर इस यूनिवर्सिटी में लगाया गया।
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