उज्जैन की शाही मस्जिद पर जबरदस्त चर्चा है ,लोग आंसू बहाते हुए वीडियो डाल रहे हैं, प्रशासन आगामी कुम्भ को देखते हुए मस्जिद वालों / मुसलमानों के आगे मस्जिद के बहुत थोड़े हिस्से को हटाने के लिए कह रहा था,हालांकि पूरी मस्जिद ही सरकारी जमीन पर है.... मगर मुसलमानों ने एक नहीं मानी,जबकि मस्जिद की मूल संरचना पर दूर दूर तक प्रभाव नहीं पड़ना था...मामला हाईकोर्ट तक गया, हाईकोर्ट ने प्रशासन के पक्ष में निर्णय दिया, प्रशासन मस्जिद वालों के सामने मिमिया रहा था कि आगे का थोड़ा सा हिस्सा अपने हाथों से हटा दें, शहर क़ाज़ी खालिकउज़्ज़मा ने बमुश्किल हामी भर दी..मगर मुसलमानों जो करते आये है किया,पथराव वगैरा ! उज्जैन में हिंदुओं के 80 पूजास्थल हटाये गए है,कोई कुछ नहीं बोला !
इतने सूक्ष्म कार्य के लिए बुलडोजर का प्रयोग न होना था,न हुआ...मगर सोशल मीडिया पर बुलडोजर से पूरी मस्जिद को पूरी तरह गिराते दिखाया गया... शाही मस्जिद को अंर्तराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया गया... पूरा विपक्ष और सेकुलर राक्षस अट्टहास करने लगा.... नाटक आंसू बहाने का किया गया...हमारा रोष यह है कि हिंदुओं के 80 धार्मिक स्थलों को ज़मीदोज़ करने वाले प्रशासन ने मोमिनों के सामने मेमना बनना क्यों स्वीकार किया ?

