देवा दुबे ने फर्जी SC/ST Act के दबाव और प्रताड़ना के चलते आत्महत्या करली, लेकिन ये मुद्दा नेशनल मीडिया से गायब है! दलित होता तो शायद नेता से लेकर मीडिया तक पैर पकड़कर खड़े हो जाते। लेकिन ब्राह्मण था… यही उसकी गलती थी! अंततः उसने मौत को गले लगा लिया अब मोदी जी को थोड़ी ठंडक मिली होगी
जिस देश में कानून ही अन्याय करे , जहां लोग कानून के डर से आत्महत्या कर रहे हैं उस देश में न्याय की क्या आशा करना क्या समझदारी है? जहां कानून ही देश के लिए खतरा बन जाए वहां विकास की बात करना क्या बेईमानी नहीं?
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