अधिकतर बड़े घर की या मध्यम वर्गीय हिन्दू महिलाएँ अपने चेहरे को सवारने, थ्रेडिंग बनवाने आदि के लिए ब्यूटी पार्लर जाती हैं । और बहुत से ऐसे पार्लर होते हैं जिनका संचालन मुस्लिम महिलाएँ ही करती हैं । ये मुस्लिम महिलाएँ थ्रेडिंग आदि बनाते हुए यारी दोस्ती में उन महिलाओं से सारी जानकारी उनके घर के बारे में ले लेती हैं । उनकी हर भावना को बड़ा ही मीठा बनकर समझने का यत्न करती हैं और कभी कभी तो उन हिन्दू सहेलियों की सहायता तक करके भी उनका विश्वास जीत लेती हैं
ऐसा करके ये सब वे अपने भाईयों या फिर अन्य मुसलमान पुरुषों को ये जानकारी देती हैं उनको इन महिलाओं का नम्बर और पता आदि देकर पीछे लग देती हैं । जिससे अधिकतर शादीशुदा या फिर कुवारी लड़कियाँ इन तैयार किये मुसलमान लड़कों के आंख मटक्के में फंस जाती हैं । शादीशुदा महिला को फंसाने का एक फायदा ये भी होता है कि वो लड़के को शादी के लिए दबाव नहीं डाल सकती और अवैध सम्बन्ध जब तक चाहे रख सकती है । ऐसे ही ये महिलाएँ धड़ल्ले से लव जिहाद का शिकार हो जाती हैं ।
( याद रखें ! एक मुसलमान लड़के की नज़र आपके घर की 5 साल की बच्ची से लेकर 60 साल की महिला तक होती है )

