अजीत भाई के ट्विटर से कॉपी पेस्ट : मुल्ले शवों के साथ भी रेप करते थे। पाकिस्तान में आज भी वही हो रहा है। इसलिए हिन्दू स्त्रियाँ जौहर करती थीं। किसी दो कौड़ी की मुल्ला प्रेमी, करियर में फुँक चुकी लौंडी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि उसके लिए उसकी ‘पुसी फॉर अ रेंट’ ही जीवन का सत्य है। ऐसी लौंडियाँ सेक्स को स्वतंत्रता मानती हैं, जितनों के साथ सेक्स, उतनी अधिक स्वतंत्र। हर स्त्री ऐसा नहीं मानती। उनके लिए अरब के बाजारों में सेक्स स्लेव बनना उतना अडवेंचरस और फुलफुलिंग नहीं दिखा होगा, जितना आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझती, भैया कह कर सैंया बनाने वाली के लिए दिखता हो।
तुम नंगी हो कर एम्सटर्डम के बाजारों के शीशे में नाचों, तुम्हारी मुटल्ली देह भी किसी को पसंद आ जाएगी। हाँ, किसी योनि-केन्द्रित लौंडिया का नारीवाद यह तय नहीं करेगा कि दूसरी स्त्रियाँ रंडी बन कर ही घूमें क्योंकि तुम्हें रंडीपना बहुत पसंद है।यह पोस्ट मैंने बहुत माइल्ड लिखा है। हिन्दू नारियों पर ऐसे आक्षेप का उत्तर मैं और भी अच्छी शब्दावली के साथ दे सकता हूँ।

