तरुण खटिक SC समुदाय से थे होली के दिन सांप्रदायिक विवाद में 14 से ज्यादा मु$सलमानों ने उनकी हत्या कर दी.....लेकिन कोई दलित नेता उनके लिए नहीं खड़ा हुआ, कोई प्रदर्शन नहीं हुआ कोई नेता परिवार के साथ नहीं खड़ा हुआ, न ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठी।
वहीं निशु आजाद भी SC समुदाय से हैं स्वतंत्र भारद्वाज से विवाद हुआ तो कई नेता उनके साथ खड़े हो गए ,, प्रदर्शन हुए और गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाया गया।....क्यों 👇
दो मामले, दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं। तरुण के मामले में आरोपी मु$सलमान थे निशु के मामले में सामने वाला जनरल कैटेगरी का है। ये दोहरा मापदंड क्यों❓ न्याय सबके लिए समान होना चाहिए
