नक्सल पीड़ितों ने पी. चिदंबरम को घेरा कहा बंदूक खत्म हुई, अब 'दिमागी नक्सलवाद' का इलाज जरूरी
🇮🇳 2004–2014: नक्सली हिंसा का काला दशक
कुल हिंसक घटनाएँ:17,542
सुरक्षा बलों के जवान शहीद: 1,913
नागरिक मारे गए: 5,019
कुल नागरिक + सुरक्षा बल मौतें: 6,932
2010 सबसे घातक वर्ष रहा — अकेले इसी साल 720 नागरिक मारे गए।
🇮🇳 गृह मंत्रालय के अनुसार, 2004–2014 में नक्सली हिंसा भारत की बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक थी।एक दशक में 6,900+ नागरिक और जवानों की जान गई — नक्सली हिंसा की भारी मानवीय कीमत।नक्सली हिंसा में अपनों को खोने और जिंदगीभर के लिए दिव्यांग हुए बस्तर के नक्सल पीड़ितों ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया।
कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बस्तर शांति समिति की पत्रकार वार्ता में पीड़ितों ने कहा कि जिन परिवारों ने नक्सली बंदूकों की गोलियां और बारूदी सुरंगों का दर्द झेला है, उनके सामने नक्सली विचारधारा पर गर्व जताना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। आरोप लगाया कि पूर्व गृहमंत्री पिच तंबाराम के बयान से ऐसा परिलक्षित होता है कि उनका और उसे समय की कांग्रेस सरकार का मौन समर्थन नक्सलवादियों को था।
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