2016 से पहले NEET नहीं था तो प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में यूजी सीटें 20–50 लाख रुपये और पीजी सीटें 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बिकती थीं। ऐसे मेडिकल कॉलीज के अधिकांश मालिक आज की विपक्षी पार्टियों से जुड़े थे और सैकड़ों करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कमाते थे। "यानी समस्या पेपर लीक नहीं...समस्या NEEt की परीक्षा है इन विरोधियोंके लिए... इनकी कमाई छिन गई..
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 2016 से नीट लागू करने के बाद सामान्य और निम्न मध्यम वर्ग के बच्चों को भी मेरिट के आधार पर प्रवेश मिलने लगा और करोड़ों का यह कारोबार बंद हो गया। यही कारण है कि आज नीट बंद करने की मांग उठाई जा रही है।
डॉ सुधांशु त्रिवेदी

