दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा, "मजहब अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हम सभी के पूर्वज एक हैं।" उन्होंने मुसलमानों से अपने पूर्वजों की परंपराओं और संस्कारों को अपनाने की अपील की। बाबा रामदेव ने आगे कहा, "मुसलमान दाढ़ी रखें, मूंछ कटवाएं या जैसे चाहें वैसे वस्त्र पहनें, लेकिन अपना चरित्र अपने पूर्वजों जैसा रखें।"
समझ नहीं आता के बाबाजी ने ऐसा क्या कहा जो इतनी मिर्ची लग गयी, बाबाजी ने तो केवल अपने पूर्वजो जैसा चरित्र रखने ही कहा ना मुसलमानो को इसमें बुरा क्या हैँ? और मुसलमानो ने बुरा माना वो भी चलो ठीक हैँ लेकिन ये PDA वाले और भीम वाले क्यों बिलख रहे हैँ आखिर वो क्यों दुखी हुये हैँ.... कुछ तो गड़बड़ हैँ

