यह पानी से भरा एक मेटल या मिट्टी का बर्तन होता है, जिसके ऊपर आम के पत्ते और एक नारियल होता है। हालांकि यह एक साधारण सा अरेंजमेंट जैसा दिखता है, लेकिन असल में यह एक गहरा साइंटिफिक और स्पिरिचुअल टूल है जिसका मकसद पॉजिटिव एनर्जी को अट्रैक्ट करना है।
यहां 12 खास बातें दी गई हैं जो कलश की इंपॉर्टेंस को आसान, इंसानी तरीके से समझाती हैं:
1. एक छोटा यूनिवर्स: कलश पूरे कॉसमॉस को दिखाता है। इसका गोल आकार धरती जैसा दिखता है, जबकि खुला टॉप बड़े आसमान को दिखाता है। इसे अपने घर में रखना पूरे यूनिवर्स की एनर्जी को अपनी जगह पर बुलाने जैसा है।
2. भगवान का घर: पुरानी मान्यता के अनुसार, कलश का मुंह भगवान विष्णु का निवास स्थान है, गर्दन भगवान शिव का आसन है, और निचला हिस्सा भगवान ब्रह्मा का है। यह सबसे बड़ी त्रिमूर्ति का प्रतीक है।
3. जीवन का प्रतीक (अमृत): कलश की जड़ें "समुद्र मंथन" (समुद्र मंथन) से जुड़ी हैं, जहां अमरता का अमृत (अमृत) एक सोने के बर्तन में निकला था। यह कलश को हमेशा रहने वाले जीवन और सेहत का प्रतीक बनाता है।
4. पांच तत्वों का बैलेंस: यह प्रकृति के पांच तत्वों - बर्तन (धरती), अंदर का पानी (पानी), नारियल (हवा), मुंह (स्पेस), और पास में जला हुआ दीया (आग) को एक साथ लाता है। यह बैलेंस एक शांत माहौल बनाता है।
5. पानी की पवित्रता: अंदर का पानी वरुण देव (पानी के भगवान) को दिखाता है। यह एक शुद्ध और ट्रांसपेरेंट मन की निशानी है जो नेगेटिव विचारों और फालतू चीज़ों से मुक्त है।
6. पवित्र नारियल (श्रीफल): ऊपर रखे नारियल को 'श्रीफल' कहा जाता है, जो देवी लक्ष्मी का फल है। यह खुशहाली दिखाता है और यह पक्का करता है कि परिवार को कभी भी रिसोर्स की कमी न हो।
7. पॉजिटिविटी के लिए आम के पत्ते: आमतौर पर, गमले में पांच या सात आम के पत्ते रखे जाते हैं। साइंटिफिक तौर पर, ये पत्ते कार्बन डाइऑक्साइड सोखने और ऑक्सीजन छोड़ने में बहुत अच्छे होते हैं, जिससे पूजा की जगह के आस-पास की हवा फ्रेश और शुद्ध रहती है।
8. रक्षा सूत्र (कलावा): कलश के गले में हमेशा एक लाल पवित्र धागा बांधा जाता है। यह सुरक्षा का प्रतीक है, जिसका मतलब है कि परिवार किसी भी बुरी एनर्जी या रुकावटों से सुरक्षित रहे।
9. अनाज की नींव: कलश को कभी भी सीधे ज़मीन पर नहीं रखा जाता है। इसे हमेशा चावल या गेहूं के ढेर पर रखा जाता है। यह एक मजबूत नींव और भरपूर और खाने से भरी ज़िंदगी को दिखाता है।
10. मंत्रों को लेने वाला: माना जाता है कि पूजा के दौरान, कलश में रखा पानी मंत्रों के वाइब्रेशन को सोख लेता है। इस "चार्ज्ड" पानी को बाद में घर में शांति फैलाने के लिए छिड़का जाता है।
11. नई शुरुआत का संकेत: चाहे गृह प्रवेश हो या नया बिज़नेस शुरू करना हो, कलश सबसे पहले स्थापित किया जाता है। यह इस बात का संकेत है कि काम साफ़ दिल और भगवान के आशीर्वाद से शुरू किया जा रहा है।
12. नदियों की एकता: कलश में गंगाजल की कुछ बूँदें डालने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि प्रार्थना के दौरान, दुनिया की सभी पवित्र नदियों का रस कलश में आ जाता है, जिससे यह बहुत पवित्र हो जाता है।

