नेपाल किसी समय दुनिया का एकलौता घोषित हिन्दू राष्ट्र था.
नेपाल और भारत का रोटी-बेटी का रिश्ता बना रहा और भारत और नेपाल के लोगों ने कभी एकदूसरे को अलग नहीं समझा.
लेकिन, अचानक एक ऐसी घटना हुई कि पूरा परिदृश्य ही बदल गया.
1984 में इंदिरा गांडी की हत्या के बाद अचानक से राजीव गांडी भारत के प्रधानमंत्री बन गए.
जिसके बाद चुनाव हुए और सहानुभूति के लहर पर सवार होकर राजीव गांडी भारतीय लोकतंत्र में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश 404 सीट लाकर प्रधानमंत्री बने थे.
प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव गांधी अपनी पत्नी सोनिया के साथ दिसंबर 1988 में नेपाल के आधिकारिक दौरे पर गए जहाँ उन्होंने नेपाल के सर्वाधिक पवित्र माने जाने वाले पशुपति नाथ मंदिर में दर्शन की इच्छा जताई.
मंदिर प्रशासन ने राजीव गांधी को सपत्नीक मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी.
कारण ये था कि नेपाल के सर्वाधिक पवित्र मंदिर होने के कारण मंदिर के नियम के अनुसार केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति होती है जबकि सोनिया गांधी हिन्दू नहीं बल्कि एक ईसाई थी.
परिणाम ये हुआ कि राजीव गांधी को बिना पशुपतिनाथ के दर्शन के ही भारत लौटना पड़ा.
इस घटना को राजीव गांधी ने व्यक्तिगत अपमान के तौर पर लिया और उसने नेपाल पर अनेकों प्रतिबंध लगा दिए.
जिसके तहत उसने 1989 में नेपाल के साथ व्यापार और पारगमन संधि (Trade & Transit Treaty) नवीनीकरण नहीं करते हुए उससे अपना सारा व्यापार बंद कर दिया.
जिससे नेपाल में आर्थिक संकट पैदा हो गया.
यहाँ कि उस समय नेपाल में नमक भारत से ही जाता था लेकिन राजीव गांधी के प्रतिबंध के कारण नेपाल में नमक तक के लाले पड़ गए और वहाँ हाहाकार फैल गया.
नेपाल में डीजल पेट्रोल गैस दवाएं सब खत्म हो गए क्योंकि नेपाल हर के मामले में सिर्फ भारत पर निर्भर था
नेपाल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत उसके लिए अपनी सीमाएं सील कर देगा
भारत के दुश्मन चीन ने इसे एक मौके की तरह भुनाया और उसने इस मौके पर नेपाल की "हर तरह की" मदद की.
परिणाम ये हुआ कि नेपाल चीन की तरफ झुकने लगा और समाज में भी उसका प्रभाव दिखने लगा क्योंकि नेपाल में वामपंथ हावी होने लगा.
और, अंततः 2008 में औपचारिक रूप से नेपाल को (विश्व के एकमात्र) हिन्दू राष्ट्र (Hindu Kingdom) से बदलकर फेडरल, धर्मनिरपेक्ष (secular) लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया.
और, आज 2026 में भी नेपाल में भारत से ज्यादा चीन का प्रभाव है या हम कह सकते हैं कि नेपाल जैसा देश जो एक समय भारत के एक भाग की ही तरह समझा जाता था...
आज हमारा एक दुश्मन राष्ट्र बन चुका है.
या, रणनीतिक रूप से हम कह सकते हैं कि राजीव गांधी की एक गलती या फिर व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण चीन, नेपाल के जरिए हमें घेरने में सफल रहा.
यह एक ऐतिहासिक तथ्य है जो हमें ये बताता है कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में कैसे किसी राजनेता की अदूरदर्शिता अथवा व्यक्तिगत भावनाओं में बहकर कोई फैसला लेना देश के लिए कितना घातक हो सकता है.
इसीलिए, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भावनाओं का कोई मोल नहीं होता है बल्कि उसमें "राष्ट्र प्रथम" की नीति चलती है.

