विनोद अपने खेतों में सरकारी ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहा था, तभी पूर्व ग्राम प्रधान का बेटा इम्तियाज आता है और उसके ट्यूबवेल से हटकर पानी अपनी ओर मोड़ने लगता है विनोद उन्हें रोकने की कोशिश करता है और उसे याद दिलाता है कि उन्होंने उसके काम का बकाया 14,000 रुपए भी नहीं दिए है बहस बढ़ने लगती है तो इम्तियाज 20 से 25 मुस्लिम लोगों को लाठी, डंडे, फावड़े और हथौड़े के साथ बुला लेता है, विवाद बढ़ता देख परिवार घर की तरफ भागने लगते है लेकिन इम्तियाज उन्हें बीच में घेर लेता है और विनोद के सर पर हथौड़े से मार कर घायल कर देता है
वहीं उसके भाई और भाभी के बीच बचाव करने पर उन्हें भी बुरी तरह से मारा जाता है विनोद को अस्पताल ले जाते हुए उसकी मौत हो जाती है , इस घटना का वीडियो भी वायरल है जहां एक भीड़ हथियार के साथ हमला कर देता है, खैर धर पकड़ शुरू हो चुकी है और लोगों के दबाव में बुलडोजर कार्रवाई भी हो रही है। लेकिन क्या इससे विनोद लौटेगा? विनोद की गलती क्या थी आखिर? और वो कौन सी भीड़ थी, जो विनोद को मारने आ गई? इम्तियाज को छोड़ दे तो बाकी तो उसी गांव के होंगे, उनमें से कुछ विनोद के परिचित भी होंगे, भाईजान कहता होगा विनोद, उनका तो कुछ बिगाड़ा नहीं था, फिर इस कदर मारने को आ गए?
हमारे में अगर भीड़ जुटती है तो ज्यादातर समझाने वाले होते है, ये कौन सी भीड़ है? जो हथौड़े, फावड़े लेकर आती है? देहरादून का मामला है, वहीं देवभूमि, जिसपर विक्टिम कार्ड खेलता है एक समुदाय

