दिल्ली के विवेक विहार में जब एक घर आग की चपेट में आया तो कमरे में सो रहे लोग बाहर नहीं निकल पाए और अंदर ही जल गए कारण था ऑटोमैटिक लॉक, लखनऊ की कोचिंग में जब आग लगी तो बच्चे उसमें फंस गए, यह बताया जा रहा है कि कोचिंग में ऑटोमेटिक लॉक लगे थे, आग लगने से गेट लॉक हो गया और बच्चे बाहर निकल नहीं पाए। जब तक बिल्डिंग में बड़ा सा छेद किया जाए और उन्हें निकाला जाए तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
नई कारों में, एसी बसों में, कार्यालयों में, घरों में हर जगह ऑटोमेटिक लॉक लगते जा रहे हैं। आए दिन एसी बसों में आग लगने और दरवाजा बंद हो जाने की खबर सुनने को मिलती है। वायरिंग जलने से दरवाजे लॉक हो जाते हैं।
सिक्योरिटी फीचर के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाली कम्पनियों से दुर्घटना का हरजाना वसूल करना चाहिये साथ ही इंटीरियर, डेकोरेशन जैसी चीजों से बचना होगा ये अच्छे भले घर को लाक्षागृह बना देते हैं।
और लोगों से मुझे यह कहना है कि आप अपना दिमाग, अपने हाथों को मशीन को गिरवी देते जा रहे हो, क्या हुआ अगर हाथ से दरवाजा बंद कर लिया, कोई छोटे नहीं हो जाओगे। हवाई जहाज में मैंने दरवाजे मैनुअली बंद होते देखा है आज तक।
हर आदमी अपने को टाइट सिक्योरिटी में रखना चाहता है, बच्चों को सुरक्षा के नाम पर सौ मीटर दूर स्कूल के लिए बस लग जाएगी, या उन्हें कोई गाड़ी से छोड़ने जाएगा, फोन सर्विलांस कैमरे यह सब दुर्घटना को रोकने कम गलत फायदा उठाने के साधन बन चुके हैं।
मशीन के भरोसे मत रहिए, जीवन में सब ऑटोमैटिक मत करिए नहीं तो दरवाजा ही आपकी दीवार तुड़वा देगा, जनहानि तो होगी ही।

