सभी सनातनीयो से आग्रह है कि इन बहरूपियो का बहिष्कार करे..!ब्रह्मकुमारी ने एक ज्योति की पूजा आरम्भ करवाई, और अपने दादा लेखराज सिंधी की तस्वीर घर घर मे पहुचाई, दोनों चीजो की खिचड़ी बनाई और नाम दिया शिव बाबा, जनता को लगता है ये महादेव को पूजते हैं।
40 पार की महिलाओं को बोलते हैं कि अब तुम्हारे बच्चे भी हो चुके, अब पति को भाई जैसा सनातन का इतना पतन किसी विदेशी ने नही किया, जितना इन स्वार्थी मूर्खों ने...ब्रह्मकुमारी नहीं भ्रमकुमारी कहना उचित है और भगवान ब्रह्मा की जगह दुष्ट लेखु का चित्र लगाना घोर अधर्म का कार्य शुरू है।

