लगातार अनेकों मामले सामने आने के बाद भी हिंदू लड़कियों और उनके माता-पिता न जाने कौन से नशे में चूर है जो अब भी इन जिहादियों के बड़े आसानी से शिकार हो जाते हैं। सेकुलरिज्म कहो या भोड़ी आधुनिकता इसके दुष्परिणाम लगभग सभी को देखने मिल रहे हैं फिर भी हिंदू एक ऐसा प्राणी है जो अपने दिमाग़ पर पट्टी बांधकर जेहादी कुंवे मे अपनी बहन बेटियों के साथ कूद रहा है
समझ नहीं आता कि क्या इन्हें कोई ऐसा जिम नहीं मिलता जहां जिहादी ट्रेनर ना हो? या इन्हें अपने फोटो वीडियो बनाने में ही मजा आता है? हिंदू पुरुष यदि अपनी बच्चियों, बहन, बेटियों अपनी पत्नी आदि के फोटो वीडियो इन जिहादियों से नहीं बनवाना चाहते तो अभिलंब इन्हें जिहादी मानसिकता का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना चाहिए और नहीं तो "मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी"

