अफगानिस्तान में अफीम की खेती बंद होने के बाद पश्चिम बंगाल का मालदा असल में अफीम उगाने वाला एशिया का दूसरा सबसे बड़ा गढ़ बन चुका है। यहीं से बॉर्डर स्टेट में एक समुदाय विशेष की पौध रोपी जा रही है और चिकन नेक को काटने की तरफ कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उधर एशिया का अफीम उगाने वाला पहला गढ़ है मणिपुर। मणिपुर से नॉर्थईस्ट मैनेज किया जा रहा है।
कुल मिला के मालदा के व्यक्ति चिकन नेक बंद करेगा और मणिपुर से कंट्रोल हुआ नॉर्थईस्ट खुद को एक स्वतंत्र ईसाई देश घोषित करेगा जैसा कि बांग्लादेश से भागने से पहले ही शेख हसीना ने इस प्लान का वो हिस्सा रिवील किया था जो बांग्लादेश से जुड़ा था। ये प्लान अमेरिका ने बनाया है और अमेरिका की CIA इस अफीम की सबसे बड़ी तस्कर है।
भारत सरकार ने मणिपुर को इस अमेरिकी कारजथानी से मुक्त करवाने के लिए 2029 का टारगेट रखा है। परन्तु अब मणिपुर के साथ ही मालदा भी अमेरिकी प्लान में शामिल किया जा चुका है और बांग्लादेश के बॉर्डर पर फेंसिंग लगाने देने के लिए ममता ने आज तक भारत सरकार को जमीन उपलब्ध नहीं करवाई। अगर जमीन उपलब्ध करवा देती तो ममता को क्या हानि होती भला?
लेकिन यदि फेंसिंग लगा दी गई होती तो CIA के लिए मालदा में उगाई जा रही अफीम को बांग्लादेश में तस्करी करके ले जाना मुश्किल हो जाता जैसे मणिपुर की अफीम वे लोग आराम से म्यांमार और बांग्लादेश में तस्करी कर के ले जाते हैं। शेख हसीना से जो द्वीप अमेरिका ने मांगा था वो मणिपुर और मालदा की अफीम बंगलादेश के रास्ते उस द्वीप पर ले जाकर विश्व बाजार में बेचने के लिए एक अड्डा मांगा था।
भारत सरकार के मणिपुर में सख्ती करने की वजह से CIA ने मालदा को डेवलप किया क्योंकि उनको पहले ही काण्ड करने में लगे होते हैं बस उन्हें अपने उद्देश्य के लिए उपयोग भर करना होता है। यहां बॉर्डर क्षेत्र में ये जमात बसा के चिकन नेक काटने का प्लान शरजील इमाम का नहीं है बल्कि उसके अब्बा अमेरिका का प्लान पाकिस्तानी आतंकवादियों के जरिए शरजील इमाम के खोपड़े में घुसेड़ा गया। समय के साथ चिकन नेक काट के नॉर्थईस्ट को एक ईसाई स्टेट में कन्वर्ट करने के प्लान पे भी CIA काम कर रही है। फिलहाल चीजें अफीम की तस्करी से आगे निकल चुकी हैं। मैथ्यू वेण्डाई इसी कड़ी का एक चूज़ा था जिसको भारतीय एजेंसियों ने मोर बनाया हुआ है।
भारत सरकार के 2029 प्लान में मालदा की वजह से पश्चिम बंगाल को भी शामिल करना पड़ा। पश्चिम बंगाल में जिस तरीके से बिना कोई काम किए सिर्फ सेक्युलरिज्म के नाम पे ममता बनर्जी पूरे स्टेट को चबा जाने को उतारू थी तो उसके चंगुल से सबसे पहले मालदा को आजाद कराना और फिर बॉर्डर में फेंसिंग आदि लगा के बांग्लादेश से अफीम एवं गाय की तस्करी, ह्यूमन ट्रैफिकिंग, घुसपैठ आदि रोकना सबसे अधिक आवश्यक कार्य हैं। और ये सब तब तक संभव नहीं जब तक बंगाल को ममता बनर्जी से मुक्त न कर दिया जाय। जब तक राज्य में सपोर्टिव सरकार नहीं होगी, केंद्र अकेले कुछ नहीं कर सकता।
पंजाब में 50 किमी बॉर्डर एरिया लेने के बाद भी कल ही हथियार और ड्रग्स के कंसाइनमेंट पकड़े गए जिन्हें पाकिस्तानी ड्रोन से सम्गल किया गया था। दिल्ली में जो डॉक्टर्स ने विस्फोट किया था साथ में श्रीनगर का एक पूरा पुलिस थाना ही उसी विस्फोटक से उड़ा दिया गया था और जो हजारों किलो विस्फोटक पकड़ा गया था वो सब का सब बांग्लादेश से तस्करी करके लाया गया था। उस विस्फोटक के भारत में घुसने का इनपुट मिलते ही भारत सरकार ने बांग्लादेश को पूरे भारत में माल ढुलाई का परमिट बंद कर सीधे नजदीकी बंदरगाह का रास्ता दिखा दिया था।
मुझे लगा था कि बगलादेश के अमेरिकी प्लांटेड केयर टेकर युनुस की बकैती की वजह से रूट परमिट बंद किए गए हैं मगर वो तो पाकिस्तान के साथ भी भाईचारा करने में जुटा हुआ था और अमेरिका को इस खेल की जानकारी न हो, ऐसा हो नहीं सकता। अभी भी अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर भारत में एक और बड़ी आतंकवादी घटना अंजाम देने की तैयारी में हैं, ऐसे इनपुट हैं हमारी एजेंसियों के पास। इसलिए बांग्लादेश से तस्करी के रास्ते बंद करना बेहद आवश्यक है।
यूपी में तो नेपाल बॉर्डर की सारे अवेध बिल्डिंग उखाड़ फेंके गए और अब बिहार की बारी है। सम्राट चौधरी का पहला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट यही नेपाल बॉर्डर पर अवैध गतिविधि रोकने का ही होगा।
जिस दिन डिप्टी NSA को बंगाल में राज्यपाल नियुक्त किया गया था उसी दिन ये क्लियर हो गया था कि ये सिर्फ एक चुनाव नहीं बल्कि भारत और अमेरिका युद्ध है जिसमें CIA और भारतीय एजेंसियां आमने सामने हैं।
बंगाल का चुनाव मोदी योगी शाह ने सिर्फ लड़ा ही नहीं बल्कि मोदी जी ने स्वयं को और rss के साथ अपनी पूरी पार्टी के कैडर को देश की एजेंसियों के लिए एक टूल बना के पेश कर दिया। केंद्र में मोदी सरकार है तो एजेंसियों से मिलकर काम करना पड़ता है। भाजपा के साथ बंगाल चुनाव हमारी एजेंसियों ने भी लड़ा है।
बिना राष्ट्रपति शासन लगाए ही पूरा राष्ट्रपति शासन जैसा ही चुनाव कराया गया है। कहीं हम लोगों के चक्कर में पड़ के मोदी जी राष्ट्रपति शासन लगा दिए होते तो जिस ममता के पास बाहरी भीतरी करने के अलावा दूसरा कोई मुद्दा नहीं बचा था उसको एक सॉलिड मुद्दा मिल गया होता जनता की सिंपैथी जीतने का। तख्ता पलट लोकतांत्रिक तरीके से नहीं किया जाता तो जेन-Z आंदोलन करके रिजीम बदल देने में तो CIA ने अब पीएचडी कर ली है। हालांकि बंगाल चुनाव के बीच CIA ने अपना गोलपोस्ट बदल कर निकोबार कर लिया था। इसका मतलब ये हुआ कि CIA ने बंगाल में हार मान ली है। यदि भारतीय एजेंसियां ये चुनाव हारती तो फिर वे लोग अपना गोल पोस्ट बदलते। युद्ध तो शाश्वत है, बस गोल पोस्ट बदलते रहते हैं।
निकोबार में CIA का टूल - पप्पुआ आंधी आजकल वहां की जनता को समझा रहा है कि यहां की जमीन अडानी को दी जाएगी। CIA का मकसद साफ है, तेल खोज तो निकाले हो मोदी जी, लेकिन अब उसको जमीन से निकाल के दिखाओ, तो जाने...
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Copied, मीडिया माफिया
🖋️ Ashwini KT

