सूरत में निकाह की रात ही एक "शांतिप्रिय समुदाय" के व्यक्ति को अपने ही भाई की नाबालिग बेटी के साथ बार-बार छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। वह पिछले 15 दिनों से लड़की का शोषण कर रहा था। जब उसकी मां ने उसे चेतावनी दी, तो उसने बेशर्मी से कहा, "वह भी मेरी बेटी जैसी है, मैं तो बस उसे स्नेह दिखा रहा हूं।"
ये कितनी घटिया और घृणित मानसिकता है जो अपनी बेटी तक को गंदी नजर से देखते है उनका शारीरिक शोषण करते है। क्या फरक है इन जाहिलो और जानवरों में ? ऐसी गंदी मानसिकता को भारत ही नई इस दुनिया के किसी समाज में रहने का अधिकार नहीं.. जो सेकुलर मूर्ख इस मानसिकता के साथ भाईचारा निभाने की बात करते है वो मानसिक रूप से विक्षिप्त ही हो सकते है

