इन मोहतरमा ने बात पते की कही है लेकिन किस बुद्धिजीवी, किसी इस्लाम परस्त को इन बातों से कोई लेना देना नहीं क्योंकि भारत में मुसलमानों के लिए अलग अलग बहुत सी सुविधाएं तैयार को गई है लेकिन अपराध करने पर शरिया जैसी कोई व्यवस्था नहीं..अब शरिया केवल अय्याशी का जरिया बन चुका है
अगर मुसलमानों को शरिया के अनुरूप, 4 शादी, 3 तलाक और हलाला चाहिए तो सरकार इनके लिए शरिया के अनुशार सजा का भी प्रबंध करे

